हरियाणा में कम हो रहा ‘दूध दही का खाणा’, भैंस पालन में 24 फीसदी की गिरावट, ये है बड़े कारण

हरियाणा भारत में भैंस पालन में भारत का मुख्य केंद्र है. लेकिन 2012 के बाद से राज्य में भैंस की आबादी में 24 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है.

भैंसों की कमी का मुख्य कारण छोटे जमींदार, शहरीकरण और दूसरे राज्यों में बिक्री का कम होना है.

राज्य में 2019 पशुधन की जनगणना के अनुसार, हरियाणा में 43.76 लाख भैंस थीं. जो 2012 में 57.64 लाख भैंस थी. यह गिरावट 2007 की जनगणना की तुलना में 27 प्रतिशत कम है.

पशुधन की जनगणना हर पांच साल में की जाती है. हालांकि, इस बार पिछले सात साल बाद नवीनतम जनगणना हुई.

हरियाणा के पशुपालन और डेयरी विभाग ने मई में डेटा जारी किया और इसे अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया.

आंकड़ों से पता चलता है कि भिवानी, जींद और हिसार जिलों में भैंसों की कुल संख्या में गिरावट आई है. ये मुर्रा बेल्ट का हिस्सा हैं, जो राज्य में भैंस की सबसे लोकप्रिय नस्ल मुर्रा का केंद्र है.

2019 में पशुपालन का ब्यौरा

Sr

District

Cattle

Buffalo

Sheep

Goat

Horse

Pony

Mule

Donkey

Pig

Camel

Dog

Rabbit

Elephant

TotalLivestock

1

Ambala

71160

137620

16887

6695

516

5

226

3

4128

0

4172

56

0

241468

2

Bhiwani

105436

277739

34533

32270

584

54

182

80

3517

1001

6184

121

0

461701

3

Charkhi Dadri

38753

153675

12946

17225

190

24

111

33

1737

338

2315

14

0

227361

4

Faridabad

42988

114183

3721

6790

112

4

23

21

1562

5

2832

102

0

172343

5

Fatehabad

109062

234323

15146

13189

443

17

57

12

2160

547

2373

87

0

377416

6

Gurugram

64055

112688

3207

9752

710

99

84

88

8880

25

8248

299

0

208135

7

Hisar

170440

426486

33689

18864

570

43

106

70

4157

341

2727

39

0

657532

8

Jhajjar

62593

180527

9396

7837

347

29

330

37

11989

18

2949

45

0

276097

9

Jind

116871

396305

22853

11071

555

90

163

14

6334

106

1510

1008

0

556880

10

Kaithal

91943

281888

10939

6189

587

21

109

6

4947

13

1672

67

0

398381

11

Karnal

155294

200817

10851

9313

677

29

65

21

10346

125

4077

80

0

391695

12

Kurukshetra

101941

139065

10955

7152

469

11

40

10

4082

0

2706

28

1

266460

13

Mahendragarh

51113

187207

22995

45967

412

8

135

19

1354

807

2312

45

0

312374

14

Mewat

30088

174867

5522

26948

127

4

29

70

761

303

256

1963

0

240938

15

Palwal

49684

199491

7591

13072

320

23

64

89

3207

2

766

74

0

274383

16

Panchkula

32576

57242

3960

7608

100

1

46

22

1921

27

2340

28

0

105871

17

Panipat

74761

165172

5008

4595

387

14

22

6

4367

1

1505

45

0

255883

18

Rewari

44310

160423

5384

24127

260

16

248

22

7457

219

1877

85

0

244428

19

Rohtak

64075

174158

9981

6660

257

39

132

79

8694

2

2014

14

0

266105

20

Sirsa

235775

250809

27888

47609

398

40

231

79

1687

1289

5878

237

0

571920

21

Sonipat

111825

225771

7103

7332

456

61

31

4

12399

0

1605

62

0

366649

22

Yamunanagar

107296

126188

8213

6073

583

10

66

15

2626

1

1389

13

4

252477

Total

1932039

4376644

288768

336338

9060

642

2500

800

108312

5170

61707

4512

5

7126497

गायों के पालन में वृद्धि

हालांकि, राज्य में गाय की आबादी में 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई. 2012 में 18.07 लाख से, 2019 में उनकी आबादी बढ़कर 19.32 लाख हो गई.

पशुपालन और डेयरी विभाग के महानिदेशक बीरेंद्र सिंह ने भैंसों की संख्या में लगातार गिरावट के चार कारणों का हवाला दिया.

उन्होंने कहा कि हरियाणा में भूमि के आकार में पिछले कुछ वर्षों से गिरावट आ रही है, जिससे लोगों के पास पशुधन की गिनती कम हो रही है. सिंह ने कहा कि एक औसत किसान जो पहले चार भैंसों को पालता था, अब केवल एक को पाल रहा है.

दूसरी बात, उन्होंने कहा कि किसान अच्छी गुणवत्ता वाले पशुओं को बढ़ाना चाहते हैं. इसलिए, तीन सामान्य भैंस रखने के बजाय, किसान अब एक ही मुर्रा भैंस को पाल रहे हैं. सिंह ने यह भी बताया कि हालांकि कुल संख्या में गिरावट आई है, प्रति पशु दूध उत्पादकता में वृद्धि हुई है. 2014-15 में, उत्पादकता प्रति पशु 7.79 किलोग्राम थी, लेकिन 2018-19 में यह 9.11 किलोग्राम हो गई.

भैंस की गिनती में गिरावट का एक और कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे अन्य राज्य हरियाणा से कम भैंस खरीद रहे हैं. सिंह ने कहा कि ये राज्य हर साल कम से कम 5 प्रतिशत हरियाणा की कुल भैंसों की खरीद करते हैं.

जींद में सबसे ज्यादा मुर्रा भैंसे

द प्रिंट को रवींद्र हुड्डा, उप निदेशक, पशुपालन ने बताया कि जींद कि जो राज्य में 3.96 लाख में भैंस की दूसरी सबसे बड़ी संख्या है, जहां से आंध्र प्रदेश जैसे राज्य पिछले कई वर्षों से हरियाणा से मुर्रा नस्ल की भैंसों की खरीद लगातार कर रहे हैं.

उन्होंने कहा “इन राज्यों में भैंस पालने का क्रेज बढ़ गया है. इसके विपरीत, हरियाणा में यह उन्माद लगभग समाप्त हो रहा है. यह इस तथ्य के बावजूद है कि भैंस सौंदर्य प्रतियोगिताओं और रैंप वॉक शो जैसी प्रचार गतिविधियां यहां समय-समय पर आयोजित की जा रही हैं.”

हुड्डा ने कहा “शहरीकरण भी इस प्रवृत्ति के पीछे एक प्रमुख कारक रहा है. शहरों में पशुपालन की अनुमति नहीं है और जो लोग डेयरी उद्योग में हैं, वे तेजी से महंगे चारे के कारण नुकसान उठाते हैं.”

गाय की संख्या में वृद्धि के बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने कहा कि कई डेयरी किसान अन्य राज्यों से विभिन्न नस्लों की गाय खरीद रहे हैं.

राज्य में भैंस की संख्या कम होने के पीछे हरियाणा ने पिछले दिनों गुजरात से गीर नस्ल की गायों का आयात किया. इसी तरह, लोग अब दूसरे राज्य की नस्लें खरीद रहे हैं. इसका एक कारण हो सकता है.

उन्होंने कहा, “इसके अलावा, पड़ोसी राज्यों से आवारा पशुओं की संख्या में वृद्धि हुई है. हरियाणा विधानसभा ने 2015 में एक गौ रक्षा विधेयक पारित किया, जो बाद में एक अधिनियम बन गया. ये सभी कारक जमीन पर काम कर रहे हैं.”

2009 के आंकड़े

Sr District

Cattle

Buffalos

Sheep

Goat

Horses/ Ponies

Mules

Donkeys

Camels

Pigs

Dogs

Total Livestock

1

Ambala

67847

219240

12699

7800

11539

190

35

0

5227

10421

324577

2

Bhiwani

130342

524862

50270

50907

1927

1046

367

5404

8514

15223

773639

3

Faridabad

35299

121332

2873

11697

257

76

115

8

4225

8629

175882

4

Fatehabad

100608

321965

17254

12962

1536

277

117

1840

4995

9501

461554

5

Gurgaon

58368

153309

2464

11555

1107

310

326

91

5537

23438

233067

6

Hisar

161673

509542

49043

21960

1598

661

152

1617

8975

10011

755221

7

Jhajjar

54300

254908

19811

10381

688

917

190

112

7804

7730

349111

8

Jind

118986

503955

28066

10310

2065

652

114

102

10929

3810

675179

9

Kaithal

93635

423405

16485

9147

2443

425

122

6

10800

6984

556468

10

Karnal

149978

357618

15095

11592

2961

271

247

95

9071

10345

546928

11

Kurukshetra

93206

223258

10044

4761

1414

155

15

1

3518

6830

336372

12

Mahendragarh

50449

260823

24382

54693

813

411

62

3591

1500

7646

396724

13

Mewat

33996

228210

8107

38171

281

122

111

130

3453

743

312581

14

Palwal

38757

286294

11622

9350

447

226

135

10

4308

1844

351149

15

Panchkula

24079

68939

3467

8199

214

249

121

48

1400

4284

106716

16

Panipat

54917

245240

6913

5405

1507

135

34

2

5945

2986

320098

17

Rewari

44382

208796

8684

23237

542

839

100

1004

2688

6296

290272

18

Rohtak

61489

263444

16122

6481

1017

547

104

14

10897

5113

360115

19

Sirsa

214278

343546

41888

41724

1324

800

323

4766

1453

21491

650102

20

Sonipat

104144

348463

7422

8638

1590

496

110

1

11163

7422

482027

21

Yamunanagar

117383

218163

9906

10146

1385

204

3

3

4543

7936

361736

‘हम केवल घाटे में चल रहे हैं’

हरियाणा सरकार ने युवाओं के बीच भैंस पालन को बढ़ावा देने के लिए कई कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया है. हालांकि, स्थानीय डेयरी किसान और व्यवसाय में अन्य लोग खुश नहीं हैं.

हिसार गांव में एक छोटी सी डेयरी चलाने वाले सुरेंद्र कुमार ने कहा कि दूध की कीमतें सालों से नहीं बढ़ी हैं, जबकि भैंस के चारे से संबंधित वस्तुएं लगातार महंगी होती जा रही हैं.

एक अन्य गांव के पशुपालन व्यापारी ने कहा कि परिस्थितियों में, हमारे जैसे छोटे व्यापारी केवल घाटे में चल रहे है. हमें लोगों को रोजगार देना होता है और उनका वेतन देना होता है. कई बार भैंस की खरीद-बिक्री में धोखाधड़ी होती है, जिससे लाखों रुपये फंस जाते हैं.

उन्होंने कहा, ऐसी स्थिति में, यहां तक ​​कि छोटे शहरों और गांवों में लोग पशुपालन व्यवसाय से दूर रह रहे हैं.

वहीं रवीद्र हुड्डा ने कहा कि इस प्रवृत्ति के लिए निजी और सरकारी नौकरियों के प्रति युवाओं की आकांक्षा भी जिम्मेदार है.

किसान क्यों छोड़ रहे पशुपालन

हिसार के एक गांव बेबलपुर में हमने पशुपालक सुभाष सिंह से बात की. सुभाष बताते हैं कि करीब चार साल पहले उनके यहां पांच भैंस थी. उनका अच्छा खासा दूध डेयरी में जाता था. लेकिन अब एक गाय और एक ही भैंस है.

उन्होंने बताया कि उनके तीनों बेट दूसरे काम में लगे हुए है इसलिए अब भैंस मेरे अकेले के बस की बात नहीं है. साथ ही उन्होंने कहा कि दुध की कीमत खर्च के हिसाब से काफी कम है.

एक अन्य किसान सतपाल बताते हैं कि उनके पास तीन साल पहले चार भैंस थी. जिनका 40 लिटर से ज्यादा दूध प्रतिदिन था. लेकिन मंहगाई के कारण उन्होंने चारों भैंसों को बेच दिया और दो गाय ले ली. गाय का खर्च कम है.

वो बताते हैं कि एक भैंस एक साल का करीब 2 लाख से ज्यादा का खल, दलिया खा जाती है. इसके अलावा हरा, चारा, भूसा और एक देखभाल के लिए व्यक्ति के हिसाब से साला कु खर्च जोड़ें तो 3 से चार लाख का खर्च प्रति भैंस बैठता है.

उन्होंने कहा अगर भैंस एक दिन में 15 लीटर दूध देती है और दूध को 40 रुपये प्रति लीटर भी बेचे तो साल की कमाई 2 लाख ही होती है. जिसमें से भैंस बयाने के समय एक से दो महीने दूध नहीं देती है.

उनसे गाय के बारे में पूछने पर बताया कि उनके पास अभी दोनों गाय देसी है और दोनों का खर्च सालाना एक लाख से भी कम है.

ऐसे हरियाणा में लाखों किसान है जो इस तरह से पशुपालन को लगातार छोड़ते जा रहे है. हरियाणा जहां दूध दही का खाना वो अब धीरे-धीरे कम हो रहा है.

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