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बोर्ड परीक्षाएं रद्द करें या हों ऑनलाइन

बोर्ड परीक्षाएं रद्द करें या हों ऑनलाइन


नयी दिल्ली, 8 अप्रैल (एजेंसी)

कोविड-19 के मामलों में वृद्धि के मद्देनजर 10वीं और 12वीं कक्षा के एक लाख से अधिक छात्रों ने याचिकाओं पर हस्ताक्षर कर सरकार से मई में होने वाली बोर्ड परीक्षाएं रद्द करने या उन्हें ऑनलाइन कराने का अनुरोध किया है. पिछले दो दिनों से टि्वटर पर हैशटैग ‘कैंसल बोर्ड एग्जाम्स 2021’ ट्रेंड कर रहा है. बहरहाल सीबीएसई और सीआईएससीई ने कहा कि छात्रों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त बंदोबस्त किए गए हैं और परीक्षाओं के दौरान कोविड-19 के सभी दिशा निर्देशों का पालन किया जाएगा. ‘चेंज डॉट ओआरजी’ पर एक याचिका में कहा गया है, ‘ भारत में हालात बदतर होते जा रहे हैं. जब देश में कुछ ही मामले थे तो उन्होंने बाकी की बोर्ड परीक्षाएं रद्द कर दी थीं और अब जब मामले चरम पर हैं तो वे स्कूलों को खोलने की योजना बना रहे हैं. शिक्षा मंत्री से इस साल होने वाली सभी परीक्षाएं रद्द करने का अनुरोध करते हैं क्योंकि छात्र पहले ही बहुत तनाव में हैं.’ एक अन्य यूजर ने ट्वीट किया, ‘ कक्षाएं ऑनलाइन हुईं इसलिए परीक्षाएं भी ऑनलाइन होनी चाहिए या छात्रों को अगली कक्षा में प्रोन्नत किया जाना चाहिए.’ महामारी के कारण परीक्षाओं में देरी हो गई है और अब मई-जून में ये परीक्षाएं होनी हैं.

निशंक ने की ‘सार्थक’ योजना की शुरुआत

केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोरखरियाल निशंक ने बृहस्पतिवार को नयी दिल्ली में राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों एवं लक्ष्यों को हासिल करने में सहयोग के लिये ‘गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के जरिये छात्रों एवं शिक्षकों का समग्र विकास’ (सार्थक) योजना की शुरुआत की. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने ‘सार्थक’ योजना की रूपरेखा तैयार की है. इसे देश की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने पर मनाए जा रहे अमृत महोत्सव के तहत जारी किया गया है. इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री निशंक ने सभी पक्षकारों से ‘सार्थक’ का उपयोग स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में परिवर्तनकारी सुधार के अनुपालन की दिशा में मार्गदर्शक के रूप में करने की अपील की. उन्होंने कहा कि सार्थक योजना संवादात्मक, लचीली और समावेशी है. शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, केंद्र सरकार ने नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर एक वर्ष की कार्ययोजना तैयार की है. राज्यों को अपनी स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसे अपनाने और परिवर्तन करने की छूट है.



दैनिक ट्रिब्यून से फीड

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