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राजस्थान में रेमडेसीविर इंजेक्शन की बिक्री पर रोक, इंजेक्शन की कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार का सख्त कदम

(केजे श्रीवत्सन) जयपुर: कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में बुरी तरह से जकड़े जा चुके राजस्थान में भी रेमडेसीविर इंजेक्शन की कमी हो गयी है. ऐसे में यहां पर सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए रेमडेसीविर इंजेक्शन को अब ‘ओवर द काउंटर’ बेचने पर रोक लगा दी है. मतलब इसका सिर्फ सरकारी और सरकार से मान्यता प्राप्त अस्पतालों में ही इस्तेमाल हो सकेगा और निजी अस्पताल भी इसका सिर्फ दो दिन का ही स्टॉक रख सकेंगे.

हालांकि यह भी सही है कोरोना के इलाज के लिए जरूरी दवाईयों की भी काफी कमी हो रही है और दवा विक्रेताओं की मानें तो पिछले कुछ दिनों में ऑक्सीमीटर समेत दूसरी कई दवाइयां काफी महंगी हो गई हैं. 

राजस्थान में लगातार बढ़ रहे कोरोना सक्रमण के बीच लोगों की जान बचाने के लिए रामबाण साबित हो रहे रेमडेसीविर इंजेक्शन की भी मांग बढ़ने लगी है. जाहिर है कि जब देश के हर राज्य में इसकी मांग है तो पहले जैसे सप्लाई भी नहीं हो रही थी और कालाबाजारी बढ़ने लगी. क्योंकि इस वक्त राजस्थान के अस्पतालों में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या काफी बढ़ गयी है और गंभीर मरीजों की तादात में भी इजाफा हो गया है. 

अकेले जयपुर में 500 रेमडेसीविर इंजेक्शन मरीजों को हर रोज लगाए जा रहे हैं यही राजस्थान के बाकी जिलों की भी बात कर ली जाए तो 2500 के आसपास इंजेक्शन की हर रोज यहां जरूरत इस वक्त पड़ रही है. औषधि नियंत्रण विभाग की मानें तो जैसे-जैसे संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है, वैसे-वैसे रेमडेसीविर इंजेक्शन की मांग में भी बढ़ोतरी हुई है और मौजूदा स्टॉक की बात की जाए तो करीब 15 हजार इंजेक्शन का स्टॉक की प्रदेश में ही बचा है. 

रेमडेसीविर इंजेक्शन के साथ-साथ कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए आइवरमेक्टीन टेबलेट्स ऑक्सीमीटर जिंक जैसी दवाइयों को लेकर जब जानकारी लेनी चाही तो सबने माना की कुछ दवा की आपूर्ति में कमी तो आई है, लेकिन अभी यह उपलब्ध हो रही है. लेकिन ऑक्सीमीटर के दाम भी 500 से 800 रुपये तक बढ़ने की बात भी दावा विक्रेताओं में मान ही ली. 



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