12वीं कक्षा के बाद विषय का चुनाव करते समय ध्यान रखें ये जरूरी बाते, एक गलती आपके भविष्य में बन सकती है बाधा

Subject Choice 


जॉब डेस्क, Subject Choice 

12वीं के बाद बहुत से ऐसे विद्यार्थी होते हैं जिनको समझ में नहीं आता किवह किस विषय का चुनाव करे, जो भविष्य में उनके लिए सफलता के दरवाजे खोले. बहुत से विद्यार्थीयों के परिवार के आधे लोग चाहते हैं कि वह इंजीनियर बने. आधे चाहते हैं कि वह सिविल सर्विसेज में जाए. दोस्त उसे बिजनेस कोर्स की सलाह देते हैं लेकिन उनका मन किसी और विभाग में जाने का है. अत्यधिक विकल्प होने के कारण वह भ्रमित हो जाते हैं कि वह कौन से विषय का चुनाव करे?

दरअसल, यह उलझन हर उस विद्यार्थी की है, जो विषयों के विकल्पों के बीच अपना भविष्य तलाश रहा है. एक समय था, जब सीमित ही विकल्प होते थे जैसे इंजीनियरिंग, मेडिकल एवं सिविल सर्विसेस. अच्छे विद्यार्थी इन्हीं की ओर रुख करते थे.

लेकिन आज उसके समक्ष इतने विकल्प हैं कि वह भ्रमित हो जाता है और अगर उसने सही तरीके से विषय का चुनाव नहीं किया तो उसका भविष्य ही दांव पर लग जाता है.

कुछ मुख्य बिंदु जिन पर आपको विचार करना चाहिए

1. लक्ष्य पहले से सुनिश्चित कीजिए- आपको क्या बनना है, इसकी सोच आपको पहले से ही सुनिश्चित कर लेनी चाहिए. जब लक्ष्य सुनिश्चित होता है, तो आप सही दिशा में आगे बढ़कर प्रयास करते हैं, वहीं भ्रम आपको दिशाहीन कर देता है. इस समय देश में जिस तरह से नए-नए संस्थान खुल रहे हैं तथा वहां पढने वालों की तादाद बढ़ रही है, उसके मुताबिक शिक्षा का स्तर नहीं बढ़ा है इसलिए हर साल महाविद्यालयों से हजारों की तादाद में तकनीकी या गैर तकनीकी स्नातकों के निकलने के बाद भी नौकरियां नहीं मिलती हैं. जहां तक सही कोर्स चुनने का सवाल है, तो छात्रों को सबसे ज्यादा शीघ्र नौकरी मिलने वाले क्षेत्रों का ध्यान रखना होगा.

2. अपने करियर की योजना बनाएं- आज हर क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है. व्यावसायिक विषयों में सीमित प्रवेश संख्या होती है, प्रतिस्पर्धियों की संख्या ज्यादा है. आप में भले ही बहुत प्रतिभा या क्षमता हो, मेरिट हो, लेकिन मुमकिन है कि पसंद के कोर्स या कॉलेज में दाखिला न मिले. इसके लिए जरूरी है कि एक अलग योजना तैयार रहे. विकल्पों के लिए करियर काउंसलर, शिक्षकों, पुराने छात्रों या किसी की भी मदद ली जा सकती है.

3. सही विषय का करें चुनाव- 12वीं के बाद कोई खास कोर्स चुनना एक विद्यार्थी की रुचि और विकल्पों पर निर्भर करता है. अगर आप कलाकार या रचनाशील हैं तो विज्ञापन, फैशन, डिजाइन जैसे कोर्सेज चुन सकते हैं. अगर आपका दिमाग विश्लेषक हैं तो आपके लिए इंजीनियरिंग या टेक्नोलॉजी के क्षेत्र बेहतर होंगे. यहां बहुत सारे विशेषज्ञ कोर्सेज भी हैं जिन्हें करने के बाद करियर में ऊंची उड़ान भर सकते हैं. ऐसे में छात्र जब भी किसी खास कोर्स या प्रोग्राम में दाखिला कराने जाएं तो एक बात स्पष्ट रखें कि उस प्रोग्राम को चुनने के पीछे करने का उनका मकसद क्या है? फिर भी अगर भ्रम बना रहे तो अपना प्रोफाइलिंग टेस्ट कराएं. इससे आपको अपनी शक्ति का पता लग सकेगा और आप उसके मुताबिक कोर्स सिलेक्ट कर सकेंगे. कोर्स का सिलेक्शन करते समय इन खास बातों का ध्यान रखना जरूरी है. अपने पसंदीदा विषय को देखते हुए ही कोर्स चुनें. दूसरों की नकल से बचें, क्योंकि हर छात्र का लक्ष्य, प्रतिभा और रुचि अलग होती है.

4. स्वमूल्यांकन करें- कोई भी कोर्स का चुनाव करने से पहले यह आत्मनिर्णय करना चाहिए कि आपकी किस काम में ज्यादा रुचि है. आप उन सभी विकल्पों की सूची बनाएं जिनमें आप स्वयं को साबित कर सकते हैं.

5. विकल्प तलाशें- एक समय था, जब विकल्प सीमित थे. विज्ञान विषय के छात्रों के पास सिर्फ मेडिकल या इंजीनियरिंग के विकल्प होते थे, लेकिन अब वह दौर नहीं रहा. आज आपके सामने विकल्पों की भरमार है. आप बायोटेक्नोलॉजी, बायोइंजीनियरिंग, फिजियोथैरेपी, ऑक्यूपेशनल थैरेपी, मेडिकल ट्रांसक्रिप्शन जैसे कोर्सेज कर सकते हैं. इसी तरह आर्ट्स से 12वीं करने वाले बिजनेस या होटल मैनेजमेंट कोर्स कर रिटेलिंग, हॉस्पिटैलिटी, टूरिज्म इंडस्ट्री का हिस्सा बन सकते हैं. जो लोग रचनाशील हैं, वे फैशन डिजाइनिंग, मर्चेंडाइजिंग, स्टाइलिंग का कोर्स कर सकते हैं.

6. संस्थान का चुनाव- आजकल संस्थानों में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा होती है लेकिन सरकारी एवं प्राइवेट संस्थानों में प्रवेश लेने से पहले निम्न बिंदुओं पर जरूर विचार कर लें. पहले यह पता कर लेना चाहिए कि उस संस्थान को समुचित रेगुलेटरी अथॉरिटी से मान्यता हासिल है या नहीं? फैकल्टी की गुणवत्ता. प्रोफेसर, लेक्चरर और असिस्टेंट प्रोफेसर का अनुपात. पाठ्यक्रम विविधता. प्लेसमेंट या नौकरी मिलने का प्रतिशत एवं मूलभूत सुविधाएं.
विज्ञान के छात्रों के लिए इंजीनियरिंग एवं मेडिकल के अलावा अन्य कोर्स निम्न हैं-

1. नैनो टेक्नोलॉजी – 12वीं के बाद नैनो टेक्नोलॉजी में बीएससी या बीटेक और उसके बाद इसी सब्जेक्ट में एमएससी या एमटेक करके इस क्षेत्र में शानदार करियर बनाया जा सकता है.
2. स्पेस साइंस – इसमें 3 साल की बीएससी और 4 साल के बीटेक से लेकर पीएचडी तक के कोर्सेज खासतौर पर इसरो और बेंगलुरु स्थित ढ्ढढ्ढस्ष्ट में कराए जाते हैं.
3. रोबोटिक साइंस – रोबोटिक में एमई की डिग्री हासिल कर चुके स्टूडेंट्स को इसरो जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में रिसर्च वर्क की नौकरी मिल सकती है.
4. एस्ट्रो-फिजिक्स – 4 या 3 साल के बैचलर्स प्रोग्राम (बीएससी इन फिजिक्स) में एडमिशन ले सकते हैं. एस्ट्रोफिजिक्स में डॉक्टरेट करने के बाद स्टूडेंट्स इसरो जैसे रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन में साइंटिस्ट बन सकते हैं.
5. डेयरी साइंस – 12वीं करने के बाद स्टूडेंट ऑल इंडिया बेसिस पर एंट्रेंस एग्जाम पास करने के बाद 4 वर्षीय स्नातक डेयरी टेक्नोलॉजी के कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं. कुछ इंस्टीट्यूट डेयरी टेक्नोलॉजी में 2 वर्षीय डिप्लोमा कोर्स भी ऑफर करते हैं.
6. एनवायर्नमेंटल साइंस – इसके तहत इकोलॉजी, डिजास्टर मैनेजमेंट, वाइल्ड लाइफ मैनेजमेंट, पॉल्यूशन कंट्रोल जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं. नौकरी की अच्छी संभावनाएं हैं.
7. माइक्रो-बायोलॉजी – बीएससी इन लाइफ साइंस या बीएससी इन माइक्रो-बायोलॉजी कोर्स कर सकते हैं.
8. वॉटर साइंस – यह जल की सतह से जुड़ा विज्ञान है. इसमें हाइड्रोमिटियोरोलॉजी, हाइड्रोजियोलॉजी, ड्रेनेज बेसिन मैनेजमेंट, वॉटर चलिटी मैनेजमेंट, हाइड्रोइंफॉर्मेटिक्स जैसे विषयों की पढ़ाई करनी होती है.

कॉमर्स एवं आर्ट्स के लिए ही परंपरागत कोर्सस से हटकर कई ऐसे व्यावसायिक क्षेत्र हैं जिनमें प्रवेश लेने के बाद आप विज्ञान के छात्रों से बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकते हैं.

1. फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट के फैशन, डिजाइन, रिटेल और मैनेजमेंट के ग्रेजुएट तथा पोस्ट ग्रेजुएट कोर्सेस के लिए ऑनलाइन सिलेक्शन टेस्ट होता है. इस टेस्ट के द्वारा 1,680 सीटों पर प्रवेश दिया जाता है. इस टेस्ट के माध्यम से फुटवियर डिजाइन एंड प्रोडक्शन मैनेजमेंट, लेदर गुड्स एंड एसेसरीज डिजाइन, फैशन डिजाइनिंग के ग्रेजुएट कोर्स में तथा एमबीए इन फैशन मर्केन्डाइजिंग एंड रिटेल मैनेजमेंट, एमबीए इन फुटवियर डिजाइन एंड प्रोडक्शन मैनेजमेंट, एम. डिजाइन के पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में प्रवेश दिया जाता है.
2. कुछ होटल मैनेजमेंट संस्थान फूड प्रोडक्शन में सर्टिफिकेट कोर्स की सुविधा भी देते हैं. भारत सरकार के 12 खाद्य संस्थान भी इससे संबंधित कोर्स कराते हैं जिन्हें करने के बाद आप न केवल शेफ बल्कि होटल उद्योग से जुडे अन्य क्षेत्रों में भी करियर बना सकते हैं. होटल मैनेजमेंट एवं कैटरिंग क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं को 12वीं उत्तीर्ण होना आवश्यक है. कई संस्थानों में दाखिले से पहले लिखित परीक्षा एवं साक्षात्कार भी लिया जाता है.
3. स्टॉक ब्रोकर बनने के लिए कम से कम वाणिज्य विषय में स्नातक (अन्य विधा के छात्रों के लिए भी रोक नहीं है) होना चाहिए. यदि आपको वित्त, व्यापार, अर्थशास्त्र, कैपिटल मार्केट अकाउंट व इन्वेस्टमेंट आदि की अच्छी समझ है तो आप अपने करियर की शुरुआत किसी स्टॉक ब्रोकिंग फर्म से जुड़कर कर सकते हैं.
4. आर्ट्स विषय पढने वाले अधिकतर स्टूडेंट्स वैसे तो सिविल सर्विस की तैयारी में जुटे रहते हैं, लेकिन इसके अतिरिक्त प्रोफेशनल तौर पर एमबीए, जर्नलिज्म, मार्केट एनालिसिस, टीचिंग, एंथ्रोपोलॉजी, ह्यूमन रिसोर्स, एमएसडब्लू आदि क्षेत्रों में भी काफी करियर के विकल्प मौजूद हैं.