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पंजाब में दूसरे राज्यों का अनाज खरीदने की अनुमति नहीं, बेचने वालों पर की जा रही कार्रवाई: भारत भूषण

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विशाल एंग्रीश, चंडीगढ़: पंजाब के फूड एंड सप्लाई मिनिस्टर भारत भूषण आशू ने केंद्रीय कृषि कानूनों के मुद्दे पर कहा है कि भले ही केंद्र सरकार ने इन कानूनों का नोटिफिकेशन जारी कर दिया हो, लेकिन पंजाब में किसी भी बाहरी राज्य से आ रहे अनाज को खरीदने की अनुमति नहीं दी जाएगी. धान की फसल की कटाई के बाद दूसरे राज्यों से पंजाब में आकर फसल बेचने की कोशिश कर रहे करीब 100 लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है और कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है. 

भारत भूषण ने कहा कि अब गेहूं की फसल की कटाई के बाद भी इसी तरह की सख्ती पंजाब सरकार की ओर से बरती जाएगी. कुछ दूसरे राज्यों के लोग जिन पर एफआईआर दर्ज की गई थी वो अदालत के समक्ष ये बात कह रहे हैं कि केंद्रीय कृषि कानूनों में एक राज्य से दूसरे राज्य की मंडियों में कोई भी फसल ले जाकर बेच सकता है, लेकिन पंजाब सरकार इसकी अनुमति नहीं देगी. इस पर न्यायिक प्रक्रिया भले ही चलती रहे, लेकिन पंजाब में किसी भी बाहरी राज्य से आकर किसी व्यक्ति को फसल बेचने की अनुमति नहीं होगी. पंजाब सरकार को जो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से हर साल कैश क्रेडिट लिमिट मिलती है उस पर अधिकार सिर्फ पंजाब के किसानों का है और पंजाब के किसानों की फसल ही पंजाब में सरकारी एजेंसियों के द्वारा खरीदी जाएगी. 

भारत भूषण आशू ने कहा कि पंजाब में पहले ही केंद्रीय कृषि कानूनों को रोकने के लिए अलग से चार बिल पारित किए गए हैं जो कि राज्यपाल के पास अप्रूवल के लिए पेंडिंग हैं, लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि पंजाब केंद्रीय कृषि कानूनों को राज्य में लागू कर लेगा. 

वहीं इस पूरे मामले पर विपक्षी पार्टियों अकाली दल और आम आदमी पार्टी ने सवाल खड़े किए हैं. अकाली नेता दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि अजीब बात है कि कांग्रेस पार्टी को एक झूठ को छुपाने के लिए बार बार झूठ बोलना पड़ रहा है. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि उन्होंने विधानसभा में मांग की थी कि पूरे पंजाब की मंडियों को एपीएमसी एक्ट के अंडर लाया जाए और साथ ही ऐसे सख्त कानून बना दिया जाएं कि उन कानूनों को केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में भी चैलेंज ना कर सके. लेकिन इसके बावजूद पंजाब की कांग्रेस सरकार ने ऐसे बिल पारित किए है जो कि राज्यपाल और राष्ट्रपति के पास अप्रूवल के लिए पेंडिंग ही रह जाएंगे. ऐसे में पंजाब सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं. 

आम आदमी पार्टी ने भी आरोप लगाया कि विधानसभा में केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ बिल पारित करके पंजाब सरकार किसानों को धोखे में रख रही है जबकि पंजाब में पहले से ही बाहरी राज्यों से आ रहे लोगों की फसल खरीदने का काम चल रहा है.



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