भगत सिंह ने कभी पीली पगड़ी नहीं पहनी, ये चार ही असली तस्वीरें है…

Published On: April 12, 2022
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पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद से उनके कार्यालय और लोगों में पीली पगड़ी क्रेज़ बढ़ा है. ये पीली पगड़ी शहीद भगत सिंह से प्रेरित बतायी जाती है. लेकिन क्या सच में भगत सिंह पीली पकड़ पहनते थे?

इतिहासकारों का कहना है कि पीली पगड़ी में स्वतंत्रता सेनानी शहीद भगत सिंह की एक लोकप्रियबहुप्रचारित तस्वीर 1975 की एक पेंटिंग पर आधारित है. भगत सिंह 23 मार्च, 1931 को फांसी के समय केवल 23 वर्ष के थेउन्होंने कभी पीली पगड़ी नहीं पहनी थी.

शहीद भगत सिंह की पेंटिंग.

इतिहासकार चमन लाल बताते हैं कि वास्तव में भगत सिंह की केवल चार ज्ञात तस्वीरें हैं – एक बच्चे के रूप में और फिर एक सफेद पगड़ी में लाहौर के नेशनल कॉलेज में एक छात्र के रूप मेंलाहौर में पुलिस हिरासत में जहां वह खुले बालों के साथ बैठे दिखाई दे रहे हैं. एक टोपी के साथ.

आम आदमी पार्टी (आपद्वारा कई कार्यालयों में इसे प्रमुखता से प्रदर्शित करने के साथ पीली पगड़ी की तस्वीर ने और अधिक आकर्षण पेदा किया है. पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि दलित आइकन बी.आरअम्बेडकर और भगत सिंह दोनों की तस्वीरें राज्य सरकार के कार्यालयों में प्रमुखता से प्रदर्शित की जाएंगी.

भगत सिंह पर कई पुस्तकों के लेखक चमन लाल ने पीटीआई को बताया कि “भगत सिंह की केवल चार वास्तविक तस्वीरें हैं. उनमें से एक को पंजाब के सरकारी कार्यालयों में लगाने के बजाय, प्रशासन ने 1975 में कलाकार अमर सिंह की पेंटिंग के आधार पर एक तस्वीर को चुना.

शहीद भगत सिंह के बचपन की तस्वीर.

उन्होंने कहा ”पेंटिंग पर कोई प्रतिबंध नहीं है. आप इसे घरों या सार्वजनिक बैठकों में उपयोग कर सकते हैं, लेकिन सरकारी कार्यालयों या आधिकारिक उद्देश्यों में नहीं. इसके अलावा, जब आप इसे महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, सरदार पटेल सहित अन्य ऐतिहासिक हस्तियों के लिए उपयोग नहीं करते हैं. फिर भगत सिंह के लिए पेंटिंग-आधारित तस्वीरों का उपयोग क्यों करें?” 

चमन लाल ने कहा कि लोककथाओं के इर्द-गिर्द निर्मित भगत सिंह की ये काल्पनिक छवियां जो “रोमांटिक कलाकृतियां” है, हमेशा इतनी लोकप्रिय नहीं थीं.

उन्होंने कहा, 1970 के दशक तक भगत सिंह की सबसे लोकप्रिय तस्वीर टोपी में उनमें से एक थी. इसे 3 अप्रैल 1929 को लिया गया था. पांच दिन पहले जब उन्होंने और बी के दत्त ने सेंट्रल असेंबली में बम फेंके थे, जिसे अब दिल्ली में संसद भवन कहा जाता है.

लाहौर के नेशनल कॉलेज की तस्वीर.

लाल ने यह भी याद किया कि कैसे पंजाब के नवांशहर (अब शहीद भगत सिंह नगर) जिले में तत्कालीन मुख्यमंत्री जैल सिंह द्वारा 1974 में टोपी पहने स्वतंत्रता सेनानी की एक प्रतिमा का अनावरण किया गया था, जिसे बाद में शिरोमणि अकाली दल सरकार ने बदल दिया. नई प्रतिमा पगड़ी में बनवाई गई.

इतिहासकार चमन लाल जो दिल्ली में भगत सिंह आर्काइव एंड रिसोर्स सेंटर के मानद सलाहकार भी हैं ने कहा- ‘1975 तक, पूरी दुनिया में और भारत में उन्हें टोपी पहने हुए दिखाने वाली तस्वीर के अलावा कोई अन्य तस्वीर नहीं थी जिसे प्रकाशित किया जा रहा था. राजनीतिकरण के बाद ही राजनीतिक दलों के बीच उन्हें दिखाने की दौड़ शुरू हो हुई. एक सिख, एक जाट और क्या नहीं कि पेंटिंग-आधारित तस्वीर प्रमुखता से आई.” 

लाहौर में पुलिस हिरासत की तस्वीर.

भगत सिंह का जन्म एक सिख परिवार में हुआ था, जिसका संबंध आर्य समाज से भी था. बाद में जीवन में, उन्होंने खुद को किसी भी धर्म से अलग कर लिया और खुद को नास्तिक कहा.

प्रसिद्ध इतिहासकार एस. इरफान हबीब ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और अन्य राजनीतिक दलों को “झूठी तस्वीरों” के माध्यम से भगत सिंह को एक सिख व्यक्ति बनाने के लिए कड़ी मेहनत करने के लिए कहा है.

उन्होंने कहा भगवंत मान ने राजनीति में आने तक कभी पगड़ी नहीं पहनी थी, लेकिन अब अगर वह इसे पहनना चाहते हैं, तो यह उनकी पसंद है और हम इस पर सवाल नहीं उठा रहे हैं “लेकिन भगत सिंह को अपनी पीली पगड़ी का श्रेय न दें, जो हम कह रहे हैं. उनका पीले रंग से कोई लेना-देना नहीं है. यह कभी उनकी पसंद नहीं थी, उन्होंने इस पर कभी कुछ नहीं लिखा है और न ही हमारे पास उनकी कोई तस्वीर है जिसमें वो पीली पगड़ी पहने हुए हैं.’’

शहीद भगत सिंह की टोपी के साथ तस्वीर.

चमन लाल ने दावा किया कि भगत सिंह ही नहीं अन्य क्रांतिकारी- उधम सिंह और करतार सिंह सराभा की तस्वीरों को भी राजनीतिक पार्टियों ने ग़लत पेश किया है. 

भगत सिंह के नायक सराभा 1914-15 के ग़दर आंदोलन के सबसे कम उम्र के शहीदों में से थे. 1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड का बदला लेने के लिए उद्धम सिंह ने 1940 में ब्रिटिश भारत में पंजाब के पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओ’डायर की हत्या कर दी थी.

‘उधम सिंह की फोटो भी असली नहीं’

इतिहासकार चमन लाल के मुताबिक उधम सिंह की उपयोग की गई तस्वीरें वास्तविक नहीं हैं. वहीं पगड़ी पहने करतार सिंह सराभा का चित्रण भी झूठा है.

शहीद उधम सिंह.

सराभा की एकमात्र ज्ञात तस्वीर बर्कले (यूसीबी) में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय की है. जिसमें वे पगड़ी पहने हुए नहीं दिखते हैं. उन्होंने कहा उधम सिंह की छवि के साथ जो किया जा रहा है वह भगत सिंह से भी बदतर है.

शहीद करतार सिंह सराभा.

“उधम सिंह की किसी भी वास्तविक तस्वीर का उपयोग नहीं किया गया है. वह शायद ही कभी पगड़ी पहनते थे और दाढ़ी नहीं रखते थे. यहां तक ​​कि प्रशासन ने अमृतसर के जलियांवाला बाग में जो मूर्ति लगाई है, वह झूठी है और पंजाब में उनके गृहनगर की मूर्तियां भी झूठी हैं.

कावेरी

कावेरी "द न्यूज़ रिपेयर" की एक समर्पित और खोजी पत्रकार हैं, जो जमीनी हकीकत को सामने लाने के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी में सामाजिक सरोकार, जनहित और निष्पक्ष रिपोर्टिंग की झलक मिलती है। कावेरी का उद्देश्य है—सच्ची खबरों के ज़रिए समाज में बदलाव लाना और उन आवाज़ों को मंच देना जो अक्सर अनसुनी रह जाती हैं। पत्रकारिता में उनकी पैनी नजर और निष्पक्ष दृष्टिकोण "द न्यूज़ रिपेयर" को विश्वसनीयता की नई ऊँचाइयों तक ले जा रहे हैं।

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