टेरर फंडिंग मामले में कश्मीरी अलगाववादी यासीन मलिक को उम्र क़ैद, NIA ने की थी मृत्यु दंड की मांग

Published On: May 25, 2022
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नई दिल्ली: कश्मीरी अलगाववादी यासीन मलिक को टेरर फंडिंग केस में उम्रकैद की सज़ा अदालत ने दी है. हालांकि NIA की तरफ से आतंकवाद के वित्तपोषण के मामले में दोषी कश्मीरी अलगाववादी नेता को मृत्युदंड दिए जाने की मांग अदालत में की गयी थी. मलिक को सेक्शन 121 में उम्रकैद की सज़ा हुई है.

साथ ही यूएपीए के सेक्शन 17 में भी उम्रकैद की सजा सुनाई गयी है. अदालत ने कहा है कि दोनों ही सजा साथसाथ चलेगी. 10 लाख 70 हज़ार का जुर्माना भी अदालत ने अलगावादी नेता पर लगाया है.एनआईए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने 19 मई को मलिक को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोपों में दोषी ठहराया था

पटियाला हाउस स्थित विशेष न्यायाधीश ने एनआईए अधिकारियों को उसकी वित्तीय स्थिति का आकलन करने का निर्देश दिया थाजिससे जुर्माने की राशि निर्धारित की जा सकेइससे पहले 10 मई को मलिक ने अदालत में कहा था कि वह खुद के खिलाफ लगाए आरोपों का सामना नहीं करना चाहता है. उसने अपना जुर्म कबूल लिया था. मलिक इस वक्त दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद है.


यासीन मलिक ने अदालत में कहा, “बुरहान वानी के एनकाउंटर के 30 मिनट के भीतर मुझे गिरफ्तार कर लिया गया. अटल बिहारी वाजपेयी ने मुझे पासपोर्ट दिया और भारत ने मुझे बयान देने की इजाजत दी क्योंकि मैं अपराधी नहीं था.”

जज ने कहा कि इससे पहले यासीन मलिक के खिलाफ कोई केस नहीं चल रहा था.

एनआईए ने धारा 121 (सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना) के तहत अधिकतम सजा की मांग की है जो इस मामले में मौत की सजा है. न्यूनतम सजा आजीवन कारावास है.

मलिक ने यह भी कहा कि उन्होंने 1994 में हथियार छोड़ने के बाद से महात्मा गांधी के सिद्धांतों का पालन किया है. उन्होंने कहा, “मैं तब से कश्मीर में अहिंसक राजनीति कर रहा हूं.”

यह दावा करते हुए कि मलिक ने कहा सात प्रधानमंत्रियों के साथ काम किया है, उन्होंने भारतीय खुफिया एजेंसियों को यह बताने की चुनौती दी कि क्या वे पिछले 28 वर्षों में किसी आतंकी गतिविधियों या हिंसा में शामिल रहे हैं. मैं राजनीति से संन्यास ले लूंगा और मौत की सजा भी स्वीकार करूंगा.

आज के फैसले से पहले श्रीनगर के कुछ हिस्सों में आज बंद रहा. शहर के कुछ हिस्सों में दुकानें और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे. हालांकि, सार्वजनिक परिवहन और निजी वाहन सामान्य रूप से चल रहे है.

अधिकारियों ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए श्रीनगर के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा अधिकारियों को तैनात किया गया है.

इससे पहले अदालत ने कहा था कि मलिक ने “स्वतंत्रता संग्राम” के नाम पर जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए धन जुटाने के लिए दुनिया भर में एक विस्तृत संरचना और तंत्र स्थापित किया था.

विशेष न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने 19 मई को यासीन मलिक को दोषी ठहराया था और एनआईए अधिकारियों को उनकी वित्तीय स्थिति का आकलन करने का निर्देश दिया था ताकि लगाए जाने वाले जुर्माने की राशि का निर्धारण किया जा सके.

10 मई को, मलिक ने अदालत से कहा था कि वह अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों का मुकाबला नहीं कर रहा है जिसमें धारा 16 (आतंकवादी अधिनियम), 17 (आतंकवादी अधिनियम के लिए धन जुटाना), 18 (आतंकवादी कृत्य करने की साजिश), 20 (सदस्य होने के नाते) और 120-बी (आपराधिक साजिश) और आईपीसी की धारा 124-ए (देशद्रोह) शामिल है.

इस बीच, अदालत ने फारूक अहमद डार उर्फ ​​बिट्टा कराटे, शब्बीर शाह, मसर्रत आलम, मोहम्मद यूसुफ शाह, आफताब अहमद शाह, अल्ताफ अहमद शाह, नईम खान, मोहम्मद अकबर खांडे, राजा मेहराजुद्दीन कलवाल, बशीर अहमद भट, जहूर अहमद शाह वटाली, शब्बीर अहमद शाह, अब्दुल राशिद शेख और नवल किशोर कपूर सहित कश्मीरी अलगाववादी नेताओं के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए थे.

आरोप पत्र लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद और हिजबुल मुजाहिदीन प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन के खिलाफ भी दायर किया गया था, जिन्हें मामले में भगोड़ा घोषित किया हुआ है.

कावेरी

कावेरी "द न्यूज़ रिपेयर" की एक समर्पित और खोजी पत्रकार हैं, जो जमीनी हकीकत को सामने लाने के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी में सामाजिक सरोकार, जनहित और निष्पक्ष रिपोर्टिंग की झलक मिलती है। कावेरी का उद्देश्य है—सच्ची खबरों के ज़रिए समाज में बदलाव लाना और उन आवाज़ों को मंच देना जो अक्सर अनसुनी रह जाती हैं। पत्रकारिता में उनकी पैनी नजर और निष्पक्ष दृष्टिकोण "द न्यूज़ रिपेयर" को विश्वसनीयता की नई ऊँचाइयों तक ले जा रहे हैं।

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