अन्ना आंदोलन से निकली अरविंद केजरीवाल की पार्टी AAP को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा, ममता, शरद पवार की पार्टी को लगा तगड़ा झटका

Published On: April 11, 2023
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नई दिल्ली : अन्ना आंदोलन से 2012 में कुछ लोगों का द्वारा बनाया गया एक राजनैतिक संगठन आज राष्ट्रीय स्तर का हो गया है। दरअसल अन्ना आंदोलन से उपजी अरविंद केजरीवाल की पार्टी आम आदमी पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल गया है। सोमवार को चुनाव आयोग ने उन्हें ये दर्जा दिया है। 

जहां एक और अरविंद केजरीवाल की पार्टी के लिए ख़ुशख़बरी आई वहीं कई बड़ी पार्टियों के लिए दुखद ख़बर भी आई। दरअसल राष्ट्रीय नेता शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस का राष्ट्रीय दर्जा छीन गया है। सीपीआई को भी क्षेत्रीय पार्टी घोषित कर दिया गया है। चुनाव आयोग ने यह जानकारी दी है।

फिलहाल TMC को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा वापस दिलाने के लिए पार्टी में चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देने पर मंत्रणा चल रही है।

केजरीवाल ने बताया चमत्कार, जनता का जताया आभार

आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इतने कम समय में राष्ट्रीय पार्टी? ये किसी चमत्कार से कम नहीं। उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि सबको बहुत बहुत बधाई देश के करोड़ों लोगों ने हमें यहां तक पहुंचाया। लोगों को हमसे बहुत उम्मीद है। आज लोगों ने हमें ये बहुत बड़ी जिम्मेदारी दी है हे प्रभु, हमें आशीर्वाद दो कि हम ये जिम्मेदारी अच्छे से पूरी करें।

टिपरा मोथा को मिला स्टेट पार्टी का दर्जा

चुनाव आयोग के अनुसार, नागालैंड में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), मेघालय में वॉइस ऑफ द पीपल पार्टी और त्रिपुरा में टिपरा मोथा को राज्य राजनीतिक दल का दर्जा दिया गया है। इसके अलावा पीडीए (मणिपुर), पीएमके (पुडुचेरी), आरएलडी (उत्तर प्रदेश), बीआरएस (आंध्र प्रदेश), आरएसपी (पश्चिम बंगाल) और एमपीसी (मिजोरम) से राज्य दर्जा भी वापस ले लिया गया है।

NCP, CPI और AITC का राष्ट्रीय राजनीतिक दल का दर्जा वापस ले लिया गया है। NCP को नागालैंड और AITC को मेघालय में राज्य दलों के रूप में मान्यता दी जाएगी।

बता दें कि किसी पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा तभी मिलता है जब उसके उम्मीदवार देश में कम से कम चार राज्यों में छह प्रतिशत से अधिक वोट हासिल करें। साथ ही लोकसभा में उसका प्रतिनिधित्व कम से कम चार सांसदों का हो। राष्ट्रीय दल का दर्जा खोने के बाद पार्टी देश के सभी राज्यों में एक चुनाव चिन्ह पर चुनाव नहीं लड़ सकती है।

चुनाव आयोग ने तृणमूल को भेजा था नोटिस

ममता बनर्जी की पार्टी को 2014 में लोकसभा चुनाव के बाद राष्ट्रीय दल का दर्जा मिला था। मार्च के शुरुआत में भाजपा विधायक और बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने केंद्रीय चुनाव आयोग से तृणमूल कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा वापस लेने की मांग की थी। चुनाव आयोग ने तृणमूल को नोटिस भेजा था। जिसमें पूछा था कि राष्ट्रीय दल का दर्जा क्यों नहीं वापस लेना चहिए।

आप ने कर्नाटक हाईकोर्ट में दाखिल की थी याचिका

कर्नाटक आप के संयोजक पृथ्वी रेड्डी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उन्होंने कहा कि आप राष्ट्रीय दर्जा पाने की हकदार है। बावजूद इसके देरी की जा रही है। इस याचिका पर 16 अप्रैल को हाईकोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार को 13 अप्रैल से पहले पूरी स्थिति के बारें में आदेश जारी करने का निर्देश दिया था। जवाब में सीईसी प्रतिनिधि ने पुष्टि की है कि 11 अप्रैल को ऑर्डर जारी कर दिया जाएगा।

राष्ट्रीय दल का दर्जा पाने के लिए क्या जरूरी?

इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया के मुताबिक, कोई राजनीतिक दल एक राष्ट्रीय दल के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए आवेदन कर सकता है, अगर- यह कम से कम चार राज्यों में ‘मान्यता प्राप्त’ है। इसके अलावा पिछले लोकसभा या विधानसभा चुनाव में किन्हीं चार या अधिक राज्यों में कुल मतों का कम से कम छह प्रतिशत वोट प्राप्त किया हो और पिछले लोकसभा चुनाव में कम से कम चार सांसदों को लोकसभा भेजा हो।

2012 में अस्तित्व में आई थी आप पार्टी

गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी पहले से ही दिल्ली और पंजाब में एक मान्यता प्राप्त राज्य स्तरीय पार्टी है। AAP पार्टी को पिछले साल गोवा विधानसभा चुनाव में 6.8 प्रतिशत, गुजरात में 12.92 प्रतिशत मतदाताओं का समर्थन मिला था। दिल्ली में आप का जनाधार सबसे ज्यादा मजबूत है। केजरीवाल की आम आदमी पार्टी साल 2012 में अस्तित्व में आई थी। पिछले आठ सालों में आम आमदी पार्टी को चार राज्यों में आपने जनाधार को बढ़ाने में सफलता मिली है। दिल्ली और पंजाब में केजरीवाल की पार्टी की अकेले दम पर सरकार है।

कावेरी

कावेरी "द न्यूज़ रिपेयर" की एक समर्पित और खोजी पत्रकार हैं, जो जमीनी हकीकत को सामने लाने के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी में सामाजिक सरोकार, जनहित और निष्पक्ष रिपोर्टिंग की झलक मिलती है। कावेरी का उद्देश्य है—सच्ची खबरों के ज़रिए समाज में बदलाव लाना और उन आवाज़ों को मंच देना जो अक्सर अनसुनी रह जाती हैं। पत्रकारिता में उनकी पैनी नजर और निष्पक्ष दृष्टिकोण "द न्यूज़ रिपेयर" को विश्वसनीयता की नई ऊँचाइयों तक ले जा रहे हैं।

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