Increase Cow Milk: गाय-भैंस का दूध बढ़ाना है तो खिलाएं ये चीज, एक बार में ही भरेगी बाल्टी

Published On: March 7, 2026
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If you want to increase the milk production of cows and buffaloes

Increase Cow Milk: अगर आप भी पशुपालक है तो आपके लिए काम की खबर है। दूध देने वाले पशुओं को ज्यादा देखभाल की जरुरत होती है। गाय-भैंस जैसे दुधारू पशुर के खान पान पर ज्यादा ध्यान देने की जरुरत है।

अगर आपकी गाय-भैंस के दूध देने की कम क्षमता के चलते आप परेशान है तो आपको चिंता करने की जरुत नहीं है। हम आपको ऐसा तरकी बताने जा रहे हैं जिससे आपके दुधारू पशु के दूध देने की क्षमता में बढ़ोत्तरी होगी।

भारत एक ऐसा देश है जो दूध के उत्पादन में नंबर एक है लेकिन इसे यह खिताब इसलिए मिला है क्योंकि यहां पशुओं की संख्या अधिक है। इसके बावजूद यहां दूध का उत्पादन अन्य देशों की तुलना में काफी कम है।

विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में दुधारू पशुओं के आहार पर कम ध्यान दिया जाता है। पशुओं को सर्वोत्तम आहार और चारा खिलाना चाहिए लेकिन भारत में इस ओर ध्यान नहीं दिया जाता। ऐसे में दूध देने वाले पशुओं को सही चारा और दाना उपलब्ध कराना बहुत जरूरी है।

चारा और अनाज कैसा है?

400 किलोग्राम वजन वाले पशु को पालने के लिए प्रतिदिन औसतन 1।5 किलोग्राम दाना कड़वे भूसे के साथ देना चाहिए। जबकि प्रत्येक 3।0 किलो दूध उत्पादन पर गाय को 1 किलो दाना अलग से देना चाहिए।

इस तरह एक गाय जिसका वजन करीब 11 किलो है। प्रतिदिन दूध देती है, उसे पैरा भूसा या कड़वी के साथ प्रतिदिन लगभग 5।5 किलोग्राम दाना देना चाहिए। जब दालें और हरा चारा उपलब्ध हो तो दुधारू पशुओं को अनाज कम मात्रा में देना चाहिए।

सूखी घास में पोषक तत्वों की मात्रा पुआल या पुआल की तुलना में बहुत अधिक होती है। केवल सूखी घास देने से पशुओं के पालन-पोषण के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति हो जाती है, लेकिन दूध उत्पादन के लिए आवश्यकतानुसार अनाज की आवश्यकता होती है।

इस प्रकार, 400 किलोग्राम वजन वाली और 10 किलोग्राम दूध देने वाली गाय को प्रतिदिन सूखी घास के साथ चार किलोग्राम अनाज देना चाहिए।

लोबिया, बरसीम और ल्यूसर्न

पैरा, भूसा या कड़वी के साथ पालन के लिए प्रतिदिन 8 -10 किलोग्राम हरा दलहनी चारा की आवश्यकता होती है। ऐसी गायें जो प्रतिदिन लगभग पांच किलोग्राम दूध देती हैं, उन्हें आवश्यक मात्रा में पैरा भूसा या कड़वी के साथ लगभग 30 किलोग्राम हरी बरसीम या लूरसन खिलाया जा सकता है।

फिर अलग अनाज की कोई जरूरत नहीं रह जाती। सूखी घास आवश्यक मात्रा में उपलब्ध होने पर दूध उत्पादन के लिए हरी बरसीम, लूसर्न या लोबिया ही पशुओं को खिलानी चाहिए।

दलहनी चारे में कैल्शियम की मात्रा अधिक होने के कारण यह दूध उत्पादन को बनाए रखने में सहायक होता है। गैर-फलीदार हरा चारा जैसे संकर ज्वार, मक्का, एम।पी। चरी, जई आदि फलीदार हरे चारे की तुलना में कम पौष्टिक होते हैं। ये पशुओं की निर्वाह आवश्यकताओं को पूरा कर सकते हैं, लेकिन उत्पादन के लिए इन्हें दालों या अनाजों के साथ मिलाकर खिलाना चाहिए।

गर्भवती गाय का आहार

गर्भवती पशुओं को अधिक पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। गर्भावस्था के छह महीने के बाद भ्रूण के विकास की गति बढ़ जाती है, इसलिए गर्भावस्था के आखिरी तीन महीनों में आहार से अतिरिक्त पोषक तत्वों की आपूर्ति करना आवश्यक होता है।

अतः यदि तीन माह के अन्दर हरा चारा उपलब्ध हो तो 10-15 किलोग्राम हरे चारे के साथ 30-50 ग्राम खनिज लवण तथा 30 ग्राम सादा नमक दें। गर्भवती गाय को बच्चा देने से लगभग 15 दिन पहले 2-2।5 किलो दाना दें। यदि गाय जल्दी दूध देने लगे और उसके थन में सूजन दिखाई दे तो दाने की मात्रा कम कर देनी चाहिए।

विटामिन ए भी है जरूरी

ब्याने से पहले गाय को पका हुआ दलिया और गुड़ खिलाना चाहिए। साथ ही कुछ दिनों तक गेहूं का चापर/ज्वार/गेहूं का दलिया, मीठा तेल आदि भी देना चाहिए। बच्चे के जन्म के कुछ दिन बाद से ही आहार कम मात्रा में देना शुरू कर देना।

चाहिए और लगभग दो सप्ताह में आहार की पूरी मात्रा देनी चाहिए। पशुपालक स्थानीय स्तर पर उपलब्ध चारा घटकों को मिलाकर सस्ता संतुलित चारा तैयार कर सकते हैं। यदि गर्भवती एवं दूध पिलाने वाली गायों को हरा चारा उपलब्ध न हो तो उनके भोजन में विटामिन ए पाउडर देना आवश्यक है।

Sahab Ram

साहब राम "द न्यूज़ रिपेयर" के एक समर्पित और खोजी पत्रकार हैं, जो जमीनी हकीकत को सामने लाने के लिए जाने जाते हैं। उनकी लेखनी में सामाजिक सरोकार, जनहित और निष्पक्ष रिपोर्टिंग की झलक मिलती है। साहब का उद्देश्य है—सच्ची खबरों के ज़रिए समाज में बदलाव लाना और उन आवाज़ों को मंच देना जो अक्सर अनसुनी रह जाती हैं। पत्रकारिता में उनकी पैनी नजर और निष्पक्ष दृष्टिकोण "द न्यूज़ रिपेयर" को विश्वसनीयता की नई ऊँचाइयों तक ले जा रहे हैं।

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