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7 साल पहले मजदूर ने बचाई लड़की की इज्जत, लड़की ने ऐसे चुकाया एहसान


Chopal Tv, Karnataka

कहते है कि दुनिया अच्छे इंसानों पर टीकी है नहीं तो कब की खत्म हो जाती. आजकल के दौर में सड़क पर कोई मरता रहे तो लोग उसकी मदद नहीं करते बल्कि फोन में वीडियो बनाना शुरु कर देते है. लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपनी जान पर खेल कर दूसरों की जान बचाते है.

ऐसे ही एक महान शख्सियत है कर्नाटक के जिला कोलार में रहने वाले शिवदास विभूतीपुरा, शिवदास पेशे से मजूदर है, लेकिन इन्होंने जो किया शायद कोई सोच भी नहीं सकता. 7 साल पहले रोजाना की तरह शिवदास अपना काम खत्म करके घर जा रहा था. लेकिन रास्ते में उसे खेतों से किसी लड़की के चिलाने की आवाज सुनी. जहां लोग अपनी जान की परवाह करके आगे निकल जाते है वहीं शिवदास रूक गया.

शिवदास ने अपने बारे में कुछ नहीं सोचा और वह खेतों की तरफ भाग खड़ा हुआ. शिवदास ने देखा कि तीन लड़के एक लड़की के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहे थे. तीनों लड़कों ने शिवदास को मारना शुरु कर दिया. लेकिन शिवदास उनसे लड़ता रहा. लड़कों ने शिवदास को मार-मार कर अधमरा कर दिया लेकिन उसने हार नहीं मानी. और अंत में लड़कों को वहां से भागना पड़ा.

अपने जख्मों की परवाह किए बिना शिवदास लड़की को छोड़ने पहले उसके घर केईबी कालोनी गया. लेकिन घायल शिवदास वहीं बेहोश हो गया. लड़की के परिजनों ने शिवदास को अस्पताल में भर्ती कराया. उस लड़की का नाम रश्मि गुप्ता था. उसके पिता सेना में एक अधिकारी थे.

रश्मि के पिता ने बताया कि वह अपने दोस्त के साथ घूमने गई थी और उसी समय उन तीन लड़कों ने उसे दबोच लिया. उसका दोस्त तो भाग गया लेकिन मौके पर शिवदास ने उसकी मदद की. तीन दिन तक शिवदास अस्पताल में रहा और रश्मी उसकी देखभाल करती रही.

इस घटना को 7 साल बीत गए, शिवदास उसे एक सपना समझकर भूल भी गया था. लेकिन रश्मि के लिए शिवदास किसी फरिश्ते से कम नहीं था इसिलए 7 साल बाद रश्मि ने अपना कर्ज उतारा. रश्मि के पिता ने शिवदास को कोलार में एक घर खरीद कर दिया और एक ऑटो रिक्शा. आज शिवदास मजदूरी नहीं करता है, ऑटो चलाता है.

वहीं रश्मि का बंगलौर में अपना होटल है लेकिन वो और अक्सर शिवदास से मिलने आती रहती है. यहीं नहीं रश्मि बंगलौर में शिवदास के दोनों बच्चों को अपने पास रखकर पढ़ा रही है. अगर ऐसे ही कुछ लोगों की वजह से बेटियां खुद को थोड़ा बहुत सुरक्षित महसूस करती हैं. शिवदास जैसे लोगों से हमें सीख मिलती है कि दूसरे की मदद के लए जेब में पैसे हो ना हो हिम्मत जरुर होनी चाहिए.

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