Rule Change From 1st April: केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने 20 मार्च को नए इनकम टैक्स नियम नोटिफाई कर दिए हैं, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। इन बदलावों का उद्देश्य टैक्स सिस्टम को आसान, पारदर्शी और डिजिटल बनाना है, जिससे करोड़ों टैक्सपेयर्स को सीधा फायदा मिलेगा।
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब टैक्स से जुड़े जटिल शब्द जैसे “Previous Year” और “Assessment Year” हटा दिए गए हैं। उनकी जगह “Tax Year” शब्द का इस्तेमाल होगा, जिससे आम लोगों के लिए टैक्स समझना और फाइल करना आसान हो जाएगा। साथ ही ITR फॉर्म भी सरल किए जाएंगे और रिफंड जल्दी मिलने की उम्मीद है।
नौकरीपेशा लोगों के लिए भी अहम बदलाव किए गए हैं। अब PF, NPS और सुपरएनुएशन में कुल 7.5 लाख रुपये से ज्यादा निवेश पर टैक्स लगेगा। वहीं HRA क्लेम करने के लिए अगर सालाना किराया 1 लाख रुपये से ज्यादा है, तो मकान मालिक का PAN देना जरूरी होगा। कंपनियों से मिलने वाले अन्य बेनिफिट्स पर भी टैक्स नियम अपडेट किए गए हैं।
रिटायरमेंट से जुड़े मामलों में राहत दी गई है। अगर किसी कर्मचारी ने 10 साल की सेवा पूरी कर ली है या उसकी उम्र 40 साल से ज्यादा है, तो VRS (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) से मिलने वाली राशि टैक्स-फ्री हो सकती है। साथ ही बकाया सैलरी पर टैक्स राहत के लिए नया फॉर्म भी लागू किया जाएगा।
मकान मालिकों के लिए भी राहत है। अगर किराया नहीं मिला और मामला कोर्ट में चल रहा है, तो उस इनकम पर टैक्स नहीं देना पड़ेगा। इससे रियल एस्टेट सेक्टर को राहत मिलने की उम्मीद है।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बड़ा फैसला लिया गया है। कैंसर, हृदय रोग, मानसिक बीमारी और नशा मुक्ति जैसे गंभीर इलाज पर टैक्स में पूरी छूट दी जाएगी, जिससे मरीजों पर आर्थिक बोझ कम होगा।
दूसरी ओर, बिजनेस और फ्रीलांसर के लिए नियम सख्त किए गए हैं। 10,000 रुपये से ज्यादा कैश पेमेंट पर अब टैक्स छूट नहीं मिलेगी। सरकार डिजिटल पेमेंट जैसे UPI और ई-रुपये को बढ़ावा देना चाहती है ताकि लेन-देन में पारदर्शिता बढ़े।
विदेशी डिजिटल कंपनियों पर भी टैक्स का दायरा बढ़ाया गया है। अगर कोई विदेशी ऐप या कंपनी भारत में 2 करोड़ रुपये से ज्यादा कमाती है या उसके 3 लाख से अधिक यूजर्स हैं, तो उसे भारत में टैक्स देना होगा।
इसके अलावा, शेयर और प्रॉपर्टी से जुड़े कैपिटल गेन नियमों को अधिक पारदर्शी बनाया गया है। विदेश से होने वाली आय पर डबल टैक्स से बचने के लिए नया फॉर्म लाया गया है।
अंत में, PF, ग्रेच्युटी और सुपरएनुएशन फंड के नियमों को भी सरल किया गया है। नॉमिनेशन और अकाउंट मैनेजमेंट की प्रक्रिया आसान होने से कर्मचारियों को अपने फंड को मैनेज करने में सुविधा होगी।










