दिल्ली-हरियाणा के बीच जाम-मुक्त सफर के लिए मुनक नहर पर बनने वाले एलिवेटेड कॉरिडोर की अनुमानित लागत 4700 करोड़ रुपये होगी। इस योजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) लगभग तैयार हो चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार अब इस परियोजना की जिम्मेदारी नैशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) को सौंपने की तैयारी में है।
बीते दिनों मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस योजना को लेकर पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा के साथ बैठक की, जिसमें परियोजना को एनएचएआई को सौंपने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी गई।
20 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा
मुनक नहर पर इंद्रलोक से यूईआर-2 तक करीब 20 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का निर्माण प्रस्तावित है। इसके बनने से हरियाणा और दिल्ली के बीच आवाजाही करने वाले ट्रैफिक के साथ-साथ उत्तरी और उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के कई इलाकों में जाम की समस्या में कमी आएगी।
4700 करोड़ रुपये खर्च होंगे
पीडब्ल्यूडी द्वारा अब तक तैयार रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना के तहत कॉरिडोर के निर्माण पर लगभग 4700 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसे एनएचएआई द्वारा पूरा किया जाएगा। हालांकि, परियोजना के लिए फंडिंग कौन करेगा, इस पर अभी फैसला नहीं हुआ है।
कॉरिडोर का मतलब क्या हो जाता है?
कॉरिडोर का मतलब दो शहरों या देशों को जोड़ने वाले बड़े रास्ते को भी कॉरिडोर कहा जाता है। जैसे, ‘दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर’ का मतलब दिल्ली और मुंबई को जोड़ने वाला एक खास रास्ता। यह सामान ले जाने या लोगों के आने-जाने के लिए बनाया जाता है। कॉरिडोर बनने के बाद ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलती है और समय की बचत होती है।








