Haryana : हरियाणा वालों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। हरियाणा डेयरी डेवलपमेंट कोऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड ने दूध की क्षमता बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। आपको बता दें कि फिलहाल प्रदेश में 6 वीटा मिल्क प्लांट का संचालन हो रहा है। वहीं अब सातवें सबसे बड़े स्काडा विधि से संचालित होने वाले मिल्क प्लांट को रेवाड़ी के बावल में स्थापित किया जाएगा।
जानें कब संचालित हुआ था सबसे पहला मिल्क प्लांट
आपको बता दें कि प्रदेश में सबसे पहले जींद में 1970-1972 में मिल्क प्लांट स्थापित किया था। जींद के प्लांट की प्रतिदिन दूध की क्षमता 1.50 लाख लीटर है। अंबाला में 1973-1974 में दूसरा प्लांट संचालित हुआ था, इस प्लांट की क्षमता 1.40 लाख लीटर प्रतिदिन की है। रोहतक में 1976-1977 में 4 लाख लीटर क्षमता के प्लांट का संचालन शुरू हुआ था।
बल्लभगढ़ में 1.25 लाख प्रतिदिन दूध की क्षमता के प्लांट का 1979-1980 से संचालन हो रहा है। सिरसा में 1.10 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले प्लांट का संचालन 1996-1997 से हो रहा है। कुरुक्षेत्र में 20 हजार लीटर क्षमता का छठा प्लांट 2014-2025 से संचालित है।
स्काडा (SCADA) का फुल फॉर्म सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन है। यह एक कंप्यूटर-आधारित प्रणाली है जो औद्योगिक प्रक्रियाओं की निगरानी और नियंत्रण करती है, और उपकरणों से वास्तविक समय में डेटा एकत्र करती है। Haryana








