मुंबई। महाराष्ट्र के मत्स्य पालन मंत्री नीतेश राणे ने सोमवार को राज्य में झटका मटन विक्रेताओं के लिए एक नई पहल की घोषणा की। इस पहल के तहत ‘मल्हार’ नामक प्रमाणन के तहत सभी झटका मटन की दुकानों का पंजीकरण अनिवार्य किया जाएगा। पंजीकृत दुकानों को ‘मल्हार सर्टिफिकेट’प्रदान किया जाएगा, जो यह सुनिश्चित करेगा कि झटका मटन केवल हिंदू विक्रेता ही बेचेंगे।
क्या है मल्हार सर्टिफिकेट?
नीतेश राणे ने बताया कि ‘मल्हार प्रमाणन प्लेटफॉर्म’ झटका मांस विक्रेताओं को प्रमाणित करने के लिए शुरू किया गया है। इस प्लेटफॉर्म के तहत झटका मटन बेचने वाली दुकानें सत्यापित होंगी और उपभोक्ताओं को हाइजीनिक, पारंपरिक और शुद्ध मांस उपलब्ध कराया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य हिंदू समुदाय के उपभोक्ताओं को झटका मटन की प्रमाणित दुकानों तक पहुंचाना है।
‘मल्हार सर्टिफिकेट’ की खासियत
- केवल सत्यापित हिंदू विक्रेताओं को प्रमाण पत्र मिलेगा।
- वेबसाइट www.malharcertification.com पर पंजीकृत दुकानों की सूची उपलब्ध होगी।
- दुकानों को हाइजीन और गुणवत्ता मानकों के आधार पर प्रमाणित किया जाएगा।
- 100% प्योर और फ्रेश मांस उपलब्ध कराने का दावा।
- अब तक पुणे की 10 दुकानों का पंजीकरण पूरा हो चुका है।
क्या होता है झटका मांस?
झटका मांस वह मांस होता है जिसे एक ही झटके में मारकर प्राप्त किया जाता है। यह प्रक्रिया हलाल मांस से अलग होती है। ‘मल्हार प्रमाणन’ इस बात को सुनिश्चित करेगा कि यह मांस हिंदू धार्मिक परंपराओं के अनुसार तैयार किया गया हो।
मंत्री नीतेश राणे की अपील
नीतेश राणे ने जनता से अपील की कि वे केवल मल्हार प्रमाणन प्राप्त दुकानों से ही मांस खरीदें। उन्होंने कहा,
“हमने हिंदू समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब हिंदुओं को झटका मटन बेचने वाली प्रमाणित दुकानों तक पहुंच मिलेगी। मैं सभी से आग्रह करता हूं कि बिना मल्हार प्रमाणन वाली दुकानों से मटन न खरीदें। जय श्री राम!”
क्या दावा करता है मल्हार प्लेटफॉर्म?
- मल्हार सर्टिफिकेट प्राप्त मांस विशेष रूप से हिंदू खटीक समुदाय के विक्रेताओं द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा।
- मांस ताजा, साफ और लार के संदूषण से मुक्त होगा।
- इसमें किसी अन्य जानवर के मांस की मिलावट नहीं होगी।
- उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता और स्वास्थ्यवर्धक मांस प्रदान किया जाएगा।
मल्हार सर्टिफिकेट पर विवाद
यह पहल हिंदू समुदाय के झटका मटन विक्रेताओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से लाई गई है। हालांकि, कुछ संगठनों और राजनेताओं ने इस कदम की आलोचना करते हुए इसे विवादास्पद और भेदभावपूर्ण बताया है।
महाराष्ट्र सरकार की इस पहल के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य में झटका मटन विक्रेताओं पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है और इसे जनता से कितनी स्वीकृति मिलती है।










