Share Market Patanjali: अदानी के बाद रामदेव बाबा की ‘पतंजलि’ को लगा तगड़ा झटका! अब तक इतने करोड़ रुपये का नुकसान

Published On: February 6, 2023
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Share Market Patanjali: बाबा रामदेव की पतंजलि फूड्स कंपनी के शेयर में दिन पर दिन गिरावट जारी है। इससे निवेशकों को बड़ा झटका लगा है। पतंजलि फूड के शेयरों में पिछले एक हफ्ते से लगातार गिरावट आ रही है।

कंपनी में पैसा लगाने वाले निवेशकों को अब तक करीब 7000 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। शेयरों में और गिरावट आने की संभावना है। ऐसे में निवेशकों को और नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

3 फरवरी को लगा था लोअर सर्किट

पतंजलि फूड्स के शेयरों में 3 फरवरी को लोअर सर्किट लगा। शेयरों को 903.35 की कीमत पर लाया गया। ट्रेडिंग के अंत में शेयर की कीमत 1 दिन पहले की तुलना में 4.63 प्रतिशत की गिरावट के साथ 906.80 रुपये पहुंच गई।


हालांकि सोमवार को थोड़ी राहत मिली है। दिन की शुरुआत में 940.00 रुपये क़ीमत रही। ट्रेंडिंग के अंत में देखना होगा की क्या पतंजलि संभल पाती है या नहीं।

वहीं, कंपनी का बाजार पूंजीकरण 32,825.69 करोड़ रुपए है। 27 जनवरी को शेयर की कीमत 1102 रुपए के स्तर पर थी। बाजार पूंजीकरण लगभग 40,000 करोड़ रुपये था।

एक हफ्ते में बाजार पूंजीकरण में 7000 करोड़ रुपए की कमी आई है। इससे निवेशकों को बड़ा झटका लगा है।

पतंजलि ने घोषित किया तिमाही परिणाम

पतंजलि फूड्स ने 31 दिसंबर, 2022 को समाप्त तिमाही के लिए अपने नतीजे घोषित कर दिए हैं। कंपनी ने 15% की वृद्धि के साथ 269 करोड़ रुपये का लाभ दर्ज किया था। जबकि 1 साल पहले का मुनाफा 234 करोड़ रुपए था।

पतंजलि फूड का रेवेन्यू 26 फीसदी बढ़कर 7,929 करोड़ रुपए हो गया। 1 साल पहले रेवेन्यू 6,280 करोड़ रुपए था। पतंजलि फूड्स के शेयर इस तरह कब तक बने रहेंगे, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।

दुविधा में निवेशक

जैसे शेयर बाजार गिरता है। दिन व दिन निवेशकों की चिंता भी बढ़ती जा रही है। बड़ी संख्या में लोगों ने पतंजलि के शेयर खरीदे हैं। इस समय शेयर बाजार में बड़ी उथल-पुथल देखने को मिल रही है।

कावेरी

कावेरी "द न्यूज़ रिपेयर" की एक समर्पित और खोजी पत्रकार हैं, जो जमीनी हकीकत को सामने लाने के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी में सामाजिक सरोकार, जनहित और निष्पक्ष रिपोर्टिंग की झलक मिलती है। कावेरी का उद्देश्य है—सच्ची खबरों के ज़रिए समाज में बदलाव लाना और उन आवाज़ों को मंच देना जो अक्सर अनसुनी रह जाती हैं। पत्रकारिता में उनकी पैनी नजर और निष्पक्ष दृष्टिकोण "द न्यूज़ रिपेयर" को विश्वसनीयता की नई ऊँचाइयों तक ले जा रहे हैं।

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