प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की पहली से तीसरी किश्त के बीच लाभार्थी किसानों की संख्या 5 करोड़ से ज्यादा घटी

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत लाभार्थी किसानों के आंकड़े चौकाने वाले आए है.  किसान सम्मान निधा योजना की वेबसाइट पर हाल में राज्यवार दिए गए आकड़ों से सामने आया है कि इस योजना का लाभ पहली बार 6 करोड़ 76 लाख 48 हजार 485 किसानों ने उठाया. लेकिन दूसरी और तीसरी किश्त में लाभार्थियों के आकड़े चौकान्ने वाले है. 

पहली किश्त 1 दिसंबर 2018 को जारी हुई थी. जिसके बाद दूसरी किश्त के समय लाभार्थी किसानों की यह संख्या घट जाती है. आकड़ों के मुताबिक एक करोड़ 62 लाख 27 हजार 683 किसान कम हो जाते हैं. वेबसाइट की सूचना के मुताबिक दूसरी किश्त के लाभार्थियों की संख्या 5 करोड़ 14 लाख 20 हजार 802 है.

वहीं तीसरी किश्त के मुताबिक 1 करोड़ 74 लाख 20 हजार 230 लाभार्थी किसान बचे. इसका मतलब 5 करोड़ 2 लाख 28 हजार 255 किसान कम हो गए. 

किसानों को तीसरी किश्त के संदर्भ में जो मैसेज मिले है उसमें कहा गया है कि आपका नाम आधार कार्ड से मेल नहीं खाता है. अगर आधार कार्ड से नाम मैच नहीं हो रहा था तो पहली और दूसरी किश्त में किसानों को किस आधार पर पैसे दिए गए?

राज्यवार कितने लाभार्थी किसान कम हुए?

अंडमान निकोबार में 15 हजार 346 किसानों में से पहली किश्त 13 हजार 446 किसानों को मिली. वहीं दूसरी किश्त 7 हजार 602 किसानों को मिली. जबकि तीसरी किश्म में किसी भी किसान लाभ नहीं मिला. 

आंध्र प्रदेश में पहली किश्त पाने वाले किसानों की संख्या 42 लाख 54 हजार 439 थी जो दूसरी किश्त में घटकर 40 लाख 97 हजार 179 हो गई. वहीं तीसरी किश्त में यह संख्या घटकर 29 लाख 75 हजार 601 पहुंच गई. 

अरुणाचल प्रदेश में भी पहली किश्त पाने वाले 14 हजार 895 किसानों थे जो दूसरी किश्त में घटकर एक हजार 727 रह गए. जबकि तीसरी किश्त में किसी का नाम आधार कार्ड मेल नहीं खाता. 

असम में 26 लाख 80 हजार 950 किसानों ने पहली किश्त का लाभ लिया. वहीं दूसरी किश्त में लाभार्थियों की संख्या घट कर 22 लाख 94 हजार 139 रह गई. जबकि तीसरी किश्म में यह संख्य आधे से कम होकर 9 लाख 59 हजार 747 रह गई.

बिहार में खेती हर किसान काफी ज्यादा है. यहां पहली किश्त का 34 लाख 41 हजार 817 किसानों ने लाभ लिया. वहीं दूसरी किश्त में लाभार्थी घट कर 27 लाख 33 हजार 357 हो गए. जबकि तीसरी किश्त में भारी गिरावट आ गई. तीसरी किश्त में लाभार्थियों की संख्या मात्र 5 लाख 86 हजार 483 ही रह गई.

चंडीगढ़ में मात्र 372 किसानों को पहली किश्त मिली. दूसरी किश्त मात्र 15 किसानों को. जबकि तीसरी किश्त में सबका नाम कट गया. यहां पर किसानों का नाम आधार कार्ड से मेल नहीं खाता. वहीं दादर नगर हवेली में पहली किश्त पाने वाले 9 हजार 199 किसान थे. तीसरी किश्त में इनकी संख्या 3 हाजर 626 ही रह गई. एसे ही दमन में भी 3 हजार 182 किसानों पहली किश्त का लाभ उठाया. तीसरी किश्त आते-आते मात्र 75 किसान ही रह गए. 

दिल्ली में पहली किश्त पाने वाले 736 किसान थे. लेकिन यहां इन किसानों को ना तो दूसरी किश्त मिली और ना ही तीसरी. ऐसे ही गोवा में पहली किश्त पाने वाले 4 हजार 999 किसान थे. जबकि तीसरी किश्त का लाभ मात्र एक हजार 650 किसानों को ही मिल सका. 

छत्तीसगढ़ में 13 लाख 77 हजार 817 किसानों ने पहली किश्त उठाई जबकि दूसरी किश्त में इनकी संख्या घटकर 4 लाख 14 हजार 28 ही रह गई. जबकि तीसरी किश्त का लाभ पाने वाले किसानों की संख्य घटकर 23 हजार 859 ही रह गई. 

गुजरात में 44 लाख 48 हजार 270 किसानों ने पहली किश्त का लाभ उठाया. वहीं दूसरी किश्त में किसानों की संख्या 10 लाख से ज्यादा कम हो गई. जबकि तीसरी किश्त में तो 30 लाख से ज्यादा किसानों का नाम कट गया. तीसरी किश्त पाने वाले मात्र 14 लाख 8 हजार 433 किसान ही बचे. 

हरियाणा भारत का एक राज्य जहां सबसे ज्यादा गेंहू की पैदावार होती है. यहां पर भी किसानों के साथ काफी धोखा हुआ है. यहां पहली किश्त पाने वाले किसानों की संख्या 13 लाख 14 हजार 153 थी. जबकि दूसरी किश्त में यह घटकर 11 लाख 82 हजार 228 रह गई. जबकि तीसरी किश्त में आधे किसानों का नाम कट गया. इनकी संख्या मात्र 6 लाख 93 हजार ही रह गई.

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हिमाचल प्रदेश में पहली किश्त 7 लाख 88 हजार 809 किसानों को मिली. जबकि दूसरी किश्त का 5 लाख 46 हजार 897 किसानों ने लाभ उठाया. वहीं तीसरी किश्त आते-आते इन किसानों की संख्या 3 लाख 92 हजार 482 ही रह गई. 

जम्मू-कश्मीर में लाभार्थी किसानों की संख्या में सबसे कम गिरावट आई है. यहां पहली किश्त पाने वाले 7 लाख 96 हजार 937 किसान थे. जबकि दूसरी किश्त पाने वालो की संख्य घटकर 6 लाख 53 हजार 396 हो गई. वहीं तीसरी किश्त 5 लाख 7 हजार 124 किसानों के खातों में आई.

झारखंड में 11 लाख 32 हजार 818 किसानों ने पहली किश्त का लाभ लिया तो दूसरी किश्त का 6 लाख 19 हजार 354 किसानों ने लाभ लिया. वहीं तीसरी किश्त में किसानों की संख्या घटकर मात्र 1 लाख 92 हजार 706 ही रह गई. 

कर्नाटक में पहली किश्त पाने वालों लाभार्थी किसानों की संख्या 35 लाख 8 हजार 121 थी. जबकि दूसरी किश्त पाने वाले  लाभार्थियों की संख्या घटकर 32 लाख 82 हजार 272 हो गई. वहीं तीसरी किश्त में तो भारी गिरावट देखी गई. यहां 32 लाख किसानों में से 30 लाख किसानों को तीसरी किश्त नसीब नहीं हुई. तीसरी किश्त पाने वाले मात्र 3 लाख 10 हजार 510 किसान ही रह गए. बाकियों का नाम आधार से मेल नहीं खाता है. 

केरेला में 21 लाख 18 हजार 100 किसानों को पहली किश्त का लाभ मिला. वहीं दूसरी किश्त का 17 लाख 19 हजार 219 किसानों को लाभ मिला. जबकि तीसरी किश्त में लाभार्थी किसानों की भारी गिरावट के साथ मात्र 4 लाख 21 हजार 955 ही रह गई. 

मध्य प्रदेश का आंकड़ा तो और भी दिलचस्प है. यहां पहली किश्त पाने वाले लाभार्थी किसानों की संख्या थी 34 लाख 31 हजार 790. जबकि दूसरी किशत में लाभार्थिययों की आधी से ज्यादा संख्या घटकर 12 लाख 23 हजार 915 ही रह गई. अब तीसरी किश्त का आंकड़ा देख आप हैरान रह जाएेंगे. यहां तीसरी किश्त में 34 लाख किसानों में सिर्फ लाभ लेने वाले मात्र 26 किसान है.

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महाराष्ट्र में पहली किश्त के समय लाभार्थी की संख्या 61 लाख 34 हजार 366 थी. दूसरी किश्त में यह संख्या आधी हो जाती है. 31 लाख 91 हजार 953 हो जाती है. मगर तीसरी किश्त में किसानों की संख्या घट कर 6 लाख 63 हजार 837 हो गई है.

मणिपुर में पहली किश्त पाने वाले लाभार्थियों की संख्या 63 हजार 464 थी. मगर दूसरी किश्त के समय यह संख्या घटकर 7 हजार 821 ही रह गई. जबकि तीसरी किश्त में लाभार्थियों की संख्या 5 हजार 361 रह गई. ऐसे ही मेघालय में पहली किश्त पाने वाले लाभार्थी की संख्या 41 हजार 244 थी. जबकि तीसरी किश्त के समय यह घट कर मात्र 2 हजार 899 ही रह गई. 

नागालैंड में भी किसानों के साथ ऐसा ही हुआ. यहां पहली किश्त पाने वाले एक लाख 25 हजार 779 किसान थे. जबकि तीसरी किश्त आते-आते इन किसानों की संख्या घटकर मात्र 20 हजार 471 रह गई. ऐसा ही मिजोरम के किसानों के साथ हुआ. यहां पहली किश्त पाने वाले किसानी की संख्या 59 हजार 270 थी. जबकि तीसरी किश्त पाने वाले लाभार्थियों की संख्या 18 हजार 966 रह गई. 

उड़ीसा में में पहली किश्त के समय लाभार्थी किसानों की संख्या 30 लाख 26 हजार 24 थी. दूसरी किश्त के वक्त इनकी संख्या घटकर 9 लाख 34 हजार 797 रह गई. जबकि तीसरी किश्त में किसी भी किसान का नाम नहीं है.

पुंडुचेरी में पहली किश्त पाने वाले किसानों की संख्या 8 हजार 737 थी. जो दूसरी किश्त में 4 हजार 89 ही रह गई. जबकि तीसरी किश्त में किसी भी लाभार्थी का नाम नहीं था. जबकि सिक्किम में किसी भी किसान को कई फायदा नहीं दिया गया है. 

पंजाब में 14 लाख 60 हजार 496 किसानों को पहली किश्त का लाभ मिला. जबकि दूसरी किश्त का 13 लाख 14 हजार 137 किसानों को लाभ मिला. जबकि तीसरी किश्त में यहा किसानों की संख्या में भारी गिरावट देखी गई. यहां तीसरी किश्त के लाभार्थियों की संख्या 14 लाख 60 हजार से मात्र 16 हजार 243 पर पहुंच गई. 

राजस्थान में इस योजना का लाभ लेने वाले किसानों की संख्या पहली किश्त के दौरान 39 लाख 95 हजार585 थी.  यह दूसरी किश्त के दौरान यह संख्या घटकर 34 लाख 6 हजार 922 रह गई. जबकि तीसरी किश्त के दौरान यह संख्या मात्र 11 लाख 75 हजार 250 रह गई. 

तमिलनाडु में पहली किश्त के लाभार्थी कि संख्या 30 लाख 92 हजार 850 थी लेकिन दूसरी किश्त के दौरान घटकर लाभार्थियों की संख्या 24 लाख 71 हजार 216 रह गई. वहीं तीसरी किश्त में तो भारी गिरावट के साथ लाभार्थी किसानों की संख्या मात्र 2 लाख 54 हजार 40 ही रह गई. यहां 28 लाख किसानों के आधार कार्ड और नाम मेल नहीं खाते. 

तेलंगाना में भी किसानों की अच्छी खासी संख्यां है. यहां पहली किश्त पाने वाले लाभार्थी किसानों की संख्या 33 लाख 483 हैं. जबकि दूसरी किश्त पाने वाले लाभार्थी की संख्या 29 लाख 55 हजार 748 थी. तीसरी किश्त में इनकी संख्या 10 लाख से ज्यादा कम हो गई. लाभार्थी की संख्या घटकर 19 लाख 72 हजार 396 ही रह गई. 

त्रिपुरा में पहली किश्त पाने वाले किसानों की संख्या 1 लाख 87 हजार 276 थी. जबकि दूसरी किश्त के लाभार्थियों की संख्या घटकर 1 लाख 76 हजार 554 रह गई. वहीं तीसरी किश्त के दौरान और अधिक गिरावट देखी गई. इनकी संख्या 1 लाख 8 हजार 290 ही रह गई. 

उत्तर प्रदेश में 1 करोड़ 62 लाख 4 हजार 468 किसानों को पहली किश्त की राशि मिली थी. जबकि दूसरी किश्त में 1 करोड़ 41 लाख 23 हजार 406 रह गई. वहीं तीसरी किश्त के वक्त लाभार्थी की संख्या 44 लाख 59 हजार 7 हो गई है. 

क्या कहते हैं किसान?

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दरअसल जब किसानों के पास तीसरी किश्त का एसएमएस आया तो किसानों काफी परेशान दिखे. उनके फोन पर मैसज था कि आपका नाम आधार कार्ड से मेल नहीं खाता. हरियाणा के एक किसान सतपाल का कहना है कि ‘जब सरकार ने दो किश्त खाते में दे दी तब आधार में और योजना में नाम मेल खा रहा था लेकिन तीसरी किश्त में हमसे बोला गया है कि जिला अधिकारी के पास जाकर सही करवाए. जबकि वहां के अधिकारी कह रहें है कि आपका नाम बिलकुल सही है. अब किसकी माने.’

एक अन्य किसान साहब राम ने कहा कि ‘सरकार किसानों को अब दफ्तरों के चक्कर कटवाना चाहती है. जब सभी चीजें आधार पर हो गई है तो आधार और इस योजना के कागज में नाम कैसे बदल सकता है. हमें नाम सही करवाने के लिए 70-70 किलोमीटर जाना पड़ता है और आगे अधिकारी कहता है कि आपके नाम में कोई गलती नहीं है. सरकार सिर्फ किसानों को गुमराह कर रही है.’

इन आंकड़ों में पश्चिम बंगाल का कोई आंकड़ा नहीं दिया गया है. हालांकि इन आंकड़ों को आप गौर से देखेंगे तो जिस राज्य में बीजेपी की सरकार नहीं वहां के लाभार्थी किसानों के तीसरी किश्त में नाम सबसे ज्यादा कम किए गए है. जैसे मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार है और यहां आंकड़ा 34 लाख किसानों से सीधे 26 किसानों पर आ पर आ गया.

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